ख़ालिद को सब जवाब आते थे… मगर क्या वह सब की सुन रहा था?
आओ बच्चो, मेरे पास आ कर बैठो। आज मैं तुम्हें ख़ालिद की एक कहानी सुनाता हूँ।
एक शाम फ़ातिमा, ख़ालिद, आयशा और उमर घर में इकट्ठे बैठे थे। बाहर हल्की हल्की हवा चल रही थी, और अंदर सब बच्चे कुछ मज़े का करना चाहते थे। फ़ातिमा की आँखें चमकीं और उसने कहा, "चलो, आज साइंस और टेक्नोलॉजी का क्विज़ खेलते हैं!"
सब ख़ुश हो गए। फ़ातिमा ने पहला सवाल पूछा, "बिजली किसने ईजाद की?"
अभी सवाल पूरा भी नहीं हुआ था कि ख़ालिद फ़ौरन बोल पड़ा, "बिजली किसी ने ईजाद नहीं की! वह तो क़ुदरत में पहले से मौजूद है। साइंसदानों ने बस उसे समझा और इस्तेमाल करना सीखा।"
फ़ातिमा मुस्कुराई, "बिल्कुल दुरुस्त!"
फिर उसने अगला सवाल पूछा, "इंटरनेट किसने बनाया?"
इस बार उमर ने जल्दी से हाथ उठाया। उसे जवाब आता था और वह बताना चाहता था। लेकिन… इससे पहले कि वह कुछ कहता, ख़ालिद फिर बोल पड़ा, "बहुत से लोगों ने मिल कर! विंट सर्फ़ और बॉब काह्न ने इसकी बुनियाद बनाने में अहम किरदार अदा किया।"
उमर का हाथ आहिस्ता से नीचे आ गया। उसने धीमी आवाज़ में कहा, "मैं भी यही बताना चाहता था…"
बच्चो, सोचो, उमर को उस वक़्त कैसा लगा होगा? थोड़ा उदास, है ना?
फ़ातिमा ने यह देखा। उसने ख़ालिद से बहुत नरमी से कहा, "ख़ालिद, तुम्हें बहुत कुछ मालूम है, और यह बहुत अच्छी बात है! लेकिन बाक़ी सब को भी सोचने और जवाब देने का मौक़ा दो।"
ख़ालिद ने उमर की तरफ़ देखा और उसे एहसास हुआ। "ओह! मैं जोश में फ़ौरन बोल पड़ा। माफ़ करना, उमर।"
फ़ातिमा ने कहा, "कोई बात नहीं! अब से हम एक उसूल बनाते हैं: हाथ उठाएँगे, अपनी बारी का इंतज़ार करेंगे, और जो बोल रहा हो उसकी पूरी बात सुनेंगे।"
सबने सर हिलाया। फिर फ़ातिमा ने अगला सवाल पूछा, "AI में प्रॉम्प्ट क्या होता है?"
अब पता है ख़ालिद ने क्या किया? उसे जवाब आता था, उसने हाथ भी उठाया… मगर इस बार वह बोला नहीं। वह ख़ामोशी से अपनी बारी का इंतज़ार करता रहा।
फ़ातिमा ने आयशा को मौक़ा दिया। आयशा ने ख़ुशी से कहा, "प्रॉम्प्ट वह सवाल या हिदायत होती है जो हम AI को देते हैं! जैसे: 'मुझे चींटी के बारे में तीन दिलचस्प बातें बताओ।'"
फ़ातिमा ने ताली बजाई, "बहुत अच्छा जवाब, आयशा!"
और ख़ालिद? वह भी मुस्कुरा रहा था। क्योंकि आज उसने एक ऐसी बात सीखी थी जो किसी क्विज़ में नहीं पूछी जाती।
बहुत कुछ जानना अच्छी बात है, मगर दूसरों की बात सुनना और उन्हें मौक़ा देना उससे भी अच्छी बात है। सच्चा समझदार वही है जो सिर्फ़ बोलता नहीं, सुनता भी है।
मिलकर बात करें
- जब ख़ालिद ने उमर से पहले जवाब दे दिया तो उमर को कैसा लगा होगा?
- फ़ातिमा ने कौन सा उसूल बनाया, और वह अच्छा क्यों है?
- आपको अपनी बारी का इंतज़ार कब मुश्किल लगता है? क्या चीज़ इंतज़ार करने में मदद कर सकती है?
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